दुर्ग। जिले के ग्राम बोडेगांव से रवेलीडीह तक नल-जल योजना के तहत पेयजल की सप्लाई की जा रही है, लेकिन रवेलीडीह में योजना की पाइपलाइन की बदहाल स्थिति जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के मुताबिक पूर्व सरपंच श्रीमती नंदकुमारी टंडन के घर के सामने पानी सप्लाई की पाइपलाइन पिछले कई महीनों से फूटी हुई है। पाइपलाइन से लगातार पानी बहने के कारण बड़ी मात्रा में पेयजल बर्बाद हो रहा है। वहीं पाइपलाइन के आसपास गंदगी और पानी जमा होने से लोगों को दूषित पानी घरों तक पहुंचने की भी चिंता सता रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रवेलीडीह के सरपंच को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। इतना ही नहीं, संबंधित PHE विभाग तक भी समस्या की जानकारी हैं। इसके बावजूद अब तक पाइपलाइन की मरम्मत नहीं होने से सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
पानी की बर्बादी पर कब जागेंगे जिम्मेदार?
नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि सप्लाई लाइन ही महीनों से क्षतिग्रस्त है और हजारों लीटर पानी लगातार बर्बाद हो रहा है, तो योजना के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठना लाजिमी है।
स्थानीय लोगों की चिंता यह भी है कि लीकेज वाली पाइपलाइन से दूषित पानी सप्लाई में मिल रहा हो तो इससे जलजनित बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि बीमारी फैलने की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि नाली, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जनता को बार-बार गुहार लगाने की नौबत नहीं आनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि ऐसी समस्याओं का समय पर निराकरण किया जाए।
अब देखना होगा कि महीनों से फूटी पाइपलाइन आखिर कब सुधरती है और बर्बाद हो रहे पेयजल को बचाने के लिए जिम्मेदार विभाग कब कार्रवाई करता है।



